छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ग्राम लोफंदी में अवैध शराब का कारोबार प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले वर्ष अवैध व जहरीली शराब के सेवन से 9 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद गांव के अलग-अलग मुहल्लों में आज भी अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है।
हादसे के बाद प्रशासन और आबकारी विभाग द्वारा कार्रवाई के दावे किए गए थे। शुरुआती दिनों में छापेमारी भी हुई, लेकिन यह कार्रवाई कुछ समय बाद ही ठंडी पड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही निगरानी ढीली हुई, शराब माफिया दोबारा सक्रिय हो गए और पहले की तरह ही अवैध शराब बेची जाने लगी।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव की गलियों और कुछ घरों से सुबह से देर रात तक शराब की बिक्री होती है। इसका सीधा असर गांव के सामाजिक माहौल पर पड़ रहा है। युवा वर्ग नशे की चपेट में आ रहा है, वहीं शराब के कारण घरेलू विवाद, मारपीट और अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। महिलाओं और बुजुर्गों में इस स्थिति को लेकर भय और नाराजगी दोनों है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन ठोस और स्थायी कार्रवाई का अभाव बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जब तक अवैध शराब बेचने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और उनकी सप्लाई पर रोक नहीं लगेगी, तब तक इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
गांववासियों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध शराब बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 9 लोगों की जान जाने के बाद भी हालात नहीं बदलना, सिस्टम की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते सख्त कदम उठाएगा, या फिर लोफंदी गांव को किसी और बड़े हादसे का इंतजार करना पड़ेगा।
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